Monday, July 27, 2015

मै मसीहा.... ना बन सका

मेरा बचपन
        उंगली पकड़ के 
                साथ ही साथ चला

हर उम्मीद की हद पे
       बिदक के रोया

जो
  मै मसीहा....
  मै मसीहा.... ना बन सका

जो जवानी बाल झाड़ के
        आई है
              सर पकडे

कहती कैसी सी दुनिया
        सब सपने गलत थे

जो
  मै मसीहा....
  मै मसीहा.... ना बन सका

दो खाली गढ़ो सी
        घूरे
            कंकाली आँखे

हर मौत से पहले
        बुढ़ापा सठियाएं

जो
  मै मसीहा....
  मै मसीहा.... ना बन सका


कोई कहता है तू
       बन जा इंजीनियर
कोई कहता है तू
       बन कुछ शरीफ
कोई कहता है
       style में रेह
कोई कहदे
       don't be cheap
केह दे कोई
        बदल थोड़ा तू मेरे लिए
कोई कह दे
        ये दुनिया है कुत्ती चीज....

Shut up .... Shut up .... Shut up ... Shut up..........

जो भी हूँ, जैसा, जहा भी
मेरी जिंदगी ये सबक

के तू मसीहा…
   तू मसीहा…

ना बन सकेगा



 

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